सरकारी विद्यालयों में स्थापित विज्ञान क्लब भविष्य में वैज्ञानिक तैयार करने में मील का पत्थर साबित होगी- नोडल अध्यापक पवन कुमार

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फिरोजपुर झिरका/ क्राइम पब्लिकेशन 

हरियाणा के सरकारी विद्यालयों में विज्ञान शिक्षा को प्रोत्साहित और प्रचारित करने के लिए हरियाणा विज्ञान एवं तकनीकी परिषद ने शिक्षा विभाग के साथ प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में विज्ञान क्लब स्थापित किए हैं। फिरोजपुर झिरका के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मे जे सी बोस विज्ञान क्लब की स्थापना की गई है। क्लब के नोडल अध्यापक डॉक्टर पवन कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि यह क्लब सितंबर 2018 में स्थापित किया गया था। जिसके तहत जनवरी से दिसंबर 2019 तक विज्ञान की विभिन्न रचनात्मक गतिविधियां करवाई जा रही है जैसे छात्रों द्वारा विज्ञान के माडल बनाकर प्रदर्शनी लगा गई, विज्ञान नवाचार को गतिविधियों द्वारा प्रोफेसर SK भारद्वाज IET, अलवर ने समझाया,

झिरका नर्सरी का भ्रमण करके पौधों को तैयार करने की विधियों को सीखा तथा आसपास के जंतु व पौधों को पहचाना एवं उनके औषधिय गुणों का सर्वे किया। विज्ञान क्लब के तहत होने वाली प्रतियोगिताओं में छात्रों ने बढ़-चढ़कर प्रतिभागिता दिखाई हैं। क्लब की गतिविधियां डॉक्टर पवन कुमार, सत्य प्रकाश प्रवक्ता एवं तेजसिंह विज्ञान अध्यापक और छात्र अजीत व ललित की देखरेख में करवाई जा रही है। विद्यार्थियों ने क्लब की गतिविधियों की प्रशन्सा करते हुए कहा कि

विज्ञान को प्रयोगात्मक एवं गतिविधियों द्वारा बेहद आसान व रोचक तरीके से सीख और समझ पा रहे हैं। विद्यालय के प्राचार्य विष्णु कुमार ने बताया कि विज्ञान क्लब के तहत छात्रों द्वारा समाज में स्वच्छता, स्वास्थ्य तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रचारित प्रसारित किया जा रहा है। नोडल अध्यापक ने कहा कि छात्रों द्वारा जल संरक्षण, पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता, बीमारियों से बचाव, कचरे का सही निपटान, पौधागिरि आदि के लिए जागरूकता

रैली, नुक्कड़ नाटक एवं पेंटिंग प्रतियोगिताएं करवाई जा रही है। प्राचार्य ने बताया कि विज्ञान क्लब विद्यालय में छात्रों में एक नई ऊर्जा का संचार किया है तथा उनमें वैज्ञानिक रूचि उत्पन्न करने में सहायक साबित हो रहा है। विभिन्न प्रतियोगिताओ के विजेताओं एवं प्रतिभागिओ को प्रमाण पत्र व इनाम देकर समानित किया गया। हैड मास्टर ओमप्रकाश एवं गणित प्रवक्ता हरिओम गोयल ने क्लब की गतिविधियों की सराहना करते हुए कहां की यह गतिविधियां छात्रों को विज्ञान एवं पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाएंगे तथा भविष्य के वैज्ञानिक भी तैयार करने में मील का पत्थर साबित होगी।