अनुसूचित जातियों व अनूसचित समुदायों के लोगों के हितों की रक्षा के लिए केन्द्र सरकार ने भी इस मुद्दे पर एक पुनर्विचार याचिका दायर की

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चंडीगढ़, 27 अप्रैल- हरियाणा सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुसूचित जातियों और अनुसूचित समुदायों  (अत्याचार निरोधक) अधिनियम-1989 के प्रावधानों के सम्बन्ध में दिये गये निर्णय तथा आपराधिक अपील संख्या 416-2018 के आदेशों की समीक्षा करने के लिए एक पुनर्विचार याचिका सर्वोच्च न्यायालय में दायर की है।
एक सरकारी प्रवक्ता ने आज यहां यह जानकारी देते हुए बताया कि सर्वोच्च न्यायलय ने 20 मार्च, 2018 को अपने निर्णय में कहा है कि अनुसूचित जातियों और अनुसूचित समुदायों (अत्याचार निरोधक) अधिनियम-1989 के तहत सरकारी कर्मचारियों और नागरिकों को बिना पूर्व अनुमति के गिरफ्तार नहीं किया जा सकता और उन्हें नियम के अधीन जांच के बाद ही गिरफ्तार किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि अनुसूचित जातियों व अनूसचित समुदायों के लोगों के हितों की रक्षा के लिए केन्द्र सरकार ने भी इस मुद्दे पर एक पुनर्विचार याचिका दायर की है। हरियाणा सरकार ने भी इस संबंध में अलग से सुप्रीम कोर्ट में स्टैंडिंग कांउसिल बीके सतीजा के माध्यम से एक पुनर्विचार याचिका दायर की है, ताकि इन वर्गों के लोगों को राहत मिल सके। 
 उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार अनुसूचित जातियों, पिछड़े वर्गों व गरीब लोगों के हितों की रक्षा के लिए तथा सामाजिक समरसता के लिए प्रतिबद्ध है। गत साढ़े तीन वर्शों में इन वर्गों के कल्याण-उत्थान के लिए कई अनूठी स्कीमें शुरू की गई हैं।
प्रवक्ता ने बताया कि विमुक्त जातियों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक उत्थान के लिए विमुक्त घुमन्तु जाति विकास बोर्ड का गठन किया गया है। विमुक्त जाति के लोगों को नागरिक आधार संरक्षण अधिनियम, 1955 के तहत दर्ज मुकदमें, भूमिपतियों द्वारा अत्याचार और भूमि बेदखली के मुकदमों की पैरवी करने के लिए कानूनी सहायता भी प्रदान की जाती है। सफाई कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए हरियाणा राज्य सफाई कर्मचारी आयोग का गठन किया जा चुका है। 
उन्होंने बताया कि बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास के लाभ पहुंचाने के सपने को साकार करने के लिए उनकी 127वीं जयंती पर प्रदेश में सात अंत्योदय भवन स्थापित किये गये हैं।

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